Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में जल तत्व की दिशाओं का विशेष महत्व है, लेकिन अक्सर अनजाने में लोग इन दिशाओं में शौचालय बनवाकर अपने जीवन और व्या...
Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में जल तत्व की दिशाओं का विशेष महत्व है, लेकिन अक्सर अनजाने में लोग इन दिशाओं में शौचालय बनवाकर अपने जीवन और व्यापार में बड़ी समस्याओं को न्यौता दे देते हैं। प्रसिद्ध वास्तुशास्त्री विष्णुप्रिया के अनुसार, उत्तर की चारों दिशाएं जल तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं और यहाँ 'शौचालय' का होना सकारात्मक ऊर्जा को सीधे 'फ्लश' करने जैसा है।
![]() |
| Purvanchal Samachar |
रिश्तों में खटास और व्यापार में सुस्ती: विष्णुप्रिया का विश्लेषण
वास्तुशास्त्री विष्णुप्रिया बताती हैं कि उत्तर-उत्तर-पश्चिम (NNW) दिशा पति-पत्नी के बीच आकर्षण और प्रेम की होती है। यहाँ शौचालय होने से आपसी खिंचाव खत्म होने लगता है और रिश्तों में नीरसता आ जाती है। वहीं, व्यापारिक दृष्टि से यह आपके 'ब्रांड औरा' को कमजोर कर देता है। इसी तरह उत्तर दिशा नए अवसरों का द्वार है। यहाँ टॉयलेट सीट होने का मतलब है—ग्राहकों का न आना, व्यापार का रुक जाना और करियर में तरक्की के अवसरों का पूरी तरह खत्म हो जाना।
बीमारियों को न्यौता: उत्तर-पूर्व का वास्तु दोष है खतरनाक
स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी जल तत्व की दिशाओं में शौचालय होना बेहद हानिकारक है। विष्णुप्रिया के अनुसार:
उत्तर-उत्तर-पूर्व (NNE): यह दिशा रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) की है। यहाँ शौचालय होने से छोटी-छोटी बीमारियां शरीर को जकड़ लेती हैं।
उत्तर-पूर्व (NE - ईशान कोण): यह दिशा सबसे संवेदनशील है। यहाँ शौचालय होने से दिमाग सही निर्णय नहीं ले पाता और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
समाधान: कब काम करेगा उपाय और कब हटाना ही विकल्प?
वास्तुशास्त्री विष्णुप्रिया ने समाधान सुझाते हुए कहा कि
उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में बने शौचालय का कोई इलाज नहीं है, इसे वहां से हटाना ही एकमात्र विकल्प है। हालांकि, अन्य तीन दिशाओं (उत्तर, उत्तर-उत्तर-पश्चिम और उत्तर-उत्तर-पूर्व) में दोष होने पर 'नीली पट्टी' (Blue Strip) का प्रयोग कर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।
